गुरु रविदास (रैदास) जयंती - Guru Ravidas Jayanti

Guru Ravidas - गुरु रविदास (रैदास) जयंती -:

गुरु रविदास (रैदास) जयंती, गुरु रविदास जी का जन्मदिन है, जो महा महीने में पूर्णिमा के दिन रविवार को मनाया जाता है। यह रविदासिया धर्म का वार्षिक केंद्र बिंदु है। इस दिन रविदासिया धर्म की पवित्र पुस्तक अमृतवाणी पढ़ी जाती है, और एक विशेष आरती होती है।

गुरु रविदास (रैदास) जी कौन थे? - Guru Ravidas

गुरु रविदास (रैदास) जयंती - Guru Ravidas Jayanti

सतगुरु रविदास (रैदास) जी भारत के सभी महापुरुषों में से एक हैं। जिन्होंने अपने वचनों से सारे संसार को एकता, भाईचारा पर जोर दिया।
गुरू रविदास (रैदास) जी का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य के काशी में माघ पूर्णिमा दिन रविवार को संवत 1388 को हुआ था।

गुरु रविदास जी का जन्म चर्मकार परिवार में हुआ था। रविदास जी को रैदास जी के नाम से भी जाना जाता है। उनके जन्म के बारे में एक दोहा प्रचलित है।

चौदह से तैंतीस कि माघ सुदी पन्दरास। 
दुखियों के कल्याण हित प्रगटे श्री रविदास।

गुरु रविदास जी के पिता राहू तथा माता का नाम करमा था। उनकी पत्नी का नाम लोना था।

मीराबाई रैदास जी को अपना गुरु मानती थीं। गुरु रविदास की कुछ रचनाएँ श्री गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित की गई हैं।

रैदास ने साधु-सन्तों की संगति से पर्याप्त व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया था। वे जूते बनाने का व्यवसाय किया करते थे।
प्रारम्भ से ही रविदास जी बहुत परोपकारी तथा दयालु व्यक्ति थे और दूसरों की सहायता करना उन्हें बहुत अच्छा लगता था। साधु-सन्तों की सहायता करने में उनको विशेष आनन्द मिलता था।

वे उन्हें प्राय: मूल्य लिये बिना जूते भेंट कर दिया करते थे। उनके इस स्वभाव के कारण उनके माता-पिता उनसे अप्रसन्न रहते थे। कुछ समय बाद उनके माता-पिता ने रविदास तथा उनकी पत्नी लोना को अपने घर से बाहर निकाल दिया।

रविदास जी पड़ोस में ही अपने लिए एक अलग घर बनाकर, अपने व्यवसाय का काम करते थे। और शेष समय ईश्वर-भजन तथा साधु-सन्तों के सत्संग में व्यतीत करते थे।

Guru Ravidas - गुरू रविदास जी स्वभाव -:

एक बार एक पर्व के अवसर पर पड़ोस के लोग गंगा-स्नान के लिए जा रहे थे। रैदास के शिष्यों में से एक ने उनसे भी चलने का आग्रह किया तो वे बोले, गंगा-स्नान के लिए मैं अवश्य चलता किन्तु। गंगा स्नान के लिए जाने पर मन यहाँ लगा रहेगा तो पुण्य कैसे प्राप्त होगा? मन जो काम करने के लिए अन्त:करण से तैयार हो वही काम करना उचित है। मन सही है तो इसे कठौते के जल में ही गंगास्नान का पुण्य प्राप्त हो सकता है। कहा जाता है कि इसके बाद से ही यह कहावत प्रचलित हो गयी कि -

मन चंगा तो कठौती में गंगा।

गुरु रविदास जी ने ऊँच-नीच की भावनाओं तथा ईश्वर-भक्ति के नाम पर किये जाने वाले विवादों को निरर्थक बताया और सभी लोगों को मिलजुल कर प्रेम पूर्वक रहने का उपदेश दिया।

अपने एक भजन में उन्होंने कहा है-

कह रैदास तेरी भगति दूरि है, भाग बड़े सो पावै।
तजि अभिमान मेटि आपा पर, पिपिलक हवै चुनि खावै।

सतगुरु रविदास (रैदास) जी के पद -:

अब कैसे छूटे राम नाम रट लागी।
प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी, जाकी अँग-अँग बास समानी॥
प्रभु जी, तुम घन बन हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा॥
प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती॥
प्रभु जी, तुम मोती, हम धागा जैसे सोनहिं मिलत सोहागा॥
प्रभु जी, तुम स्वामी हम दासा, ऐसी भक्ति करै ‘रैदासा’॥

Guru Ravidas जयंती क्यों मनाते हैं?

गुरु रविदास जयंती इसलिए बनाते हैं क्योंकि इस दिन गुरु रविदास जी का जन्म हुआ था।

गुरु रविदास जी ने कहा था कि सभी लोगों को मिलजुल कर प्रेम पूर्वक रहना चाहिए। और आपस में कभी भी झगड़ा या लड़ाई नहीं करनी चाहिए, सभी को एकता बनाएं रखना चाहिए।

Guru Ravidas जयंती महोत्सव -:

गुरु रविदास जयंती का अवसर भारत के सभी हिस्सों में एक विशेष प्रकार से मनाया जाता है।
लगभग भारत सभी गुरुद्वारों में एक विशेष प्रकार की व्यवस्था की जाती है। भारत के सभी गुरुद्वारों को रोशनियों से सजाया जाता है।

इस दिन संत रविदास जी की पूजा अर्चना की जाती है। शोभा यात्राएं निकाली जाती हैं और भजन कीर्तन कर संत रविदास को याद किया जाता है।
इस दिन रविदासिया धर्म की पवित्र पुस्तक अमृतवाणी पढ़ी जाती है, और एक विशेष आरती होती है। इस दिन को सभी लोग बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं।

आप सभी देशवासियों को गुरु रविदास जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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